मंगलवार, 22 नवंबर 2011

अशफाक कादरी व उनकी लघुकथाएं...

पाठकों को बिना किसी भेदभाव के अच्छी लघुकथाओं व लघुकथाकारों से रूबरू कराने के क्रम में हम इस ब्लाग में इस बार प्रसिद्ध साहित्यकार जनाब अशफाक कादरी की तीन लघुकथाएं उनके फोटो, परिचय के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। आशा है पाठकों को श्री कादरी की लघुकथाओं व उनके बारे में जानकर अच्छा लगेगा।   -किशोर श्रीवास्तव


परिचयः
1. पूरा नाम - एम. अशफाक कादरी
2. पिता का नाम - श्री मोहम्मद अली कादरी (शिक्षक एवं समाज सेवी)
3. जन्म तिथि - 14 जनवरी 1965 (बीकानेर)
4. शिक्षा - एम.ए.(हिन्दी साहित्य), एल.एल.बी, बी.जे.एम.सी(पत्रकारिता-जनसंचार)
5. सृजन विधायें - कहानी, लधुकथा, निबन्ध
6. राष्ट्रीय स्तरीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन- कादम्बिनी, हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, नवभारत टाईम्स, जनसत्ता, जे.वी.जी. टाईम्स, विश्वामित्र, अहा जिन्दगी, राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, दैनिक नवज्योति, राष्ट्रदूत, नई दुनिया, देशबंधु, पंजाब केसरी, अमृत संदेश, अमृत प्रभात, दैनिक ट्रिब्यून, अजीत समाचार, हरियाणा क्रांति, उत्तर उजाला, खेल हलचल, इतवारी पत्रिका, फुरसत, चेतना, धर्मयुद्ध, माणक, जलतेदीप, राज, सुजस, न्याय, रांची, एक्सप्रेस, नव अमर भारत, नवभारत, नई जमीन, दैनिक सन्मार्ग, पूर्वाचल प्रहरी, गुजरात वैभव, शब्दरंग, युगधर्म, बिहार ऑब्जरवर यंग लीडर, गगनांचल, दैनिक जागरण, गांडीव, संडे मेल, स्वदेश, स्वागत, दर्पण, विकल्प, जनमोर्चा, सहारा समय, न्याय सत्यकथा, मरूदर्शन, इतवारी अखबार, स्वर सरिता, कलावार्ता, भारतीय रेल, समाज कल्याण। मधुमती, कथाबिम्ब, शेष, संबोधन, वाड्मय, अक्षर, खबर, पंजाबी संस्कृति, अक्षरा अरावली उद्घोष, सनद्, भाषा, मरूगुलशन, आश्वस्त, शुभतारिका, अहल्या, वैचारिकी,प्रेरणा, सुमन सागर व हम सब साथ साथ।
7. अंग्रेजी - टाईम्स ऑफ इण्डिया
8. राजस्थानी - माणक, दैनिक युगपक्ष
9. पत्रकारिता - दैनिक युगपक्ष बीकानेर में 6 वर्ष तक उपसंपादक, दिव्य संसार (मासिक) का निरंतर समाचार में संपादन।
10. सम्पादन - साहित्यिक पत्रिका चन्द्रमुखी, शहादत, केसरिया बालम, मुस्कराते रहना कमल का संपादन, मरूगंगा, 26वीं बीकानेर रेंज पुलिस खेलकूद प्रतियोगिता एवं डयूटी मीट 1999 स्मारिका।
11. आकाशवाणी - आकाशवाणी बीकानेर से कहानियां, वार्ताऐं, परिचर्चाऐं, नाटक प्रसारित। 6 वर्ष तक अस्थायी उद्घोषक का कार्य, आकाशवाणी बीकानेर में नाटक कलाकार के रूप में अनुमोदित एवं कार्यक्रमों का प्रस्तुतिकरण, संचालन, संयोजन का कार्य,
12. दूरदर्शन/टीवी- जयपुर दूरदर्शन से प्रसारित ‘मरूधरा‘ कार्यक्रम में प्रख्यात साहित्यकार ए.वी कमल का साक्षात्कार, जयपुर दूरदर्शन के लिए प्रख्यात संगीतज्ञ डा0 जयचंद्र शर्मा के कार्यक्रम में योगदान, दिल्ली दूरदर्शन के कार्यक्रम ‘परख‘ में अ. भा. मांडसमारोह, टी. वी. आई चौनल नई दिल्ली के लिए ‘बीकानेर की उस्ता कला‘ पर कार्यक्रम की योजना एवं सहयोग।
13. कला संस्कृति - पर्यटन लेखक संघ, बीकानेर (राज्य के पर्यटन विकास के लिए अग्रणी), लोक कला केन्द्र बीकानेर (लोक संस्कृति के प्रचार प्रसार में अग्रणी), अल्ला जिलाई बाई मांड गायकी प्रशिक्षण संस्थान, बीकानेर (मांड गायन) में महासचिव के रूप में सेवाएं मिमझर संस्थान, बीकानेर (राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति के लिए कार्यरत संस्थान)में प्रवक्ता, अखिल भारतीय मांड समारोह बीकानेर (प्रतिवर्ष 3 नवम्बर) आयोजन, प्रचार प्रसार संयोजन। बज्में अदब, हल्का-ए, अदब, श्री संगीत भारती, स्वर साधना समिति, मुम्बई में प्रवक्ता के रूप में कार्य
14. सम्मान - शब्द शिल्पी अलंकरण सम्मान 2010 (प्रतिनिधि लघुकथाएं, जबलपुर)
डा. श्रीराम ठाकुर दादा स्मृति कथा सम्मान 2011 (म.प्र.लघुकथाकार परिषद जबलपुर)
वरिष्ठ लघुकथाकार सम्मान 2010 ( हम सब साथ साथ अ.भा. लघुकथाकार सम्मेलन, नई दिल्ली)
विजेता स्टार ओंर्गेनाईजेशन, बीकानेर द्वारा स्वतंत्र लेखन के लिए सम्मान, ‘‘शुभ तारिका‘‘ जनवरी 2008 में लधुकथा ‘‘लोग क्या कहेंगे‘‘ को प्रथम पुरस्कार, स्वतंत्रता सेनानी गंगादास कौशिक सम्मान, ‘‘बीकानेर रौ गौरव‘‘ सम्मान 2007, ‘‘बीकानेर रत्न‘‘ सम्मान 2008, सद्भावना संगीत केन्द्र संकल्प संस्थान द्वारा सम्मान।

पता - मौहल्ला चूनगरान, बीकानेर-334005(राजस्थान) फोन (0151) 2203209, मो. 9413190309 
ईमेलः quadriashfaque@rediffmail.com

लघुकथाएं...

एक गुनाह और सही

   ड़क किनारे रक्तरंजित महिला को नजर अंदाज करते हुए लोग तेजी से निकल रहे थे ।  पत्थरों से घायल अर्द्धविक्षिप्त औरत की कातर आँखे राहगीरों से सहायता की भीख मांग रही थी ।  मगर कौन कानूनी कार्यवाहियों के लफड़े में पड़े, सभी लोग नजरें बचाकर तेजी से निकल रहे थे। तभी अपने साथियों के साथ गब्बर वहां से निकला ।  उस घायल महिला को देखकर वह वापस पलटा ।  उसके साथी आश्चर्य से देखने लगे । गब्बर उस महिला की ओर झुका ।  ‘यह क्या रहे हो उस्ताद। पहले से ही पचासों केस चल रहे है। फिर नये लफड़े में फंस जायेगें ।’
    ‘इसी तरह तड़फ-तड़फ कर वह मर गयी थी मेरी बहन , किसी ने भी उसकी मदद नही की थी।  अब इस बहन को हम मरने नहीं देगे, चाहे कोई भी कार्यवाही हो, हम सामना करेंगे ।’ यह कहकर गब्बर ने तेजी से उसे महिला को अपनी बांहों में उठा लिया और रिक्शे में बिठाकर अस्पताल के लिए रवाना हो गया । 

अहसास
    अपने शहर में स्थानान्तरण हो जाने के बाद बेटा यकायक बदल गया था। वह मां-बाप की सेवा करने लगा। उनके खाने-पीने, जागने का खास ध्यान रखने लगा। असाध्य रोग से पीड़ित पिता के स्वास्थ्य की नियमित चिकित्सकीय जांच एवं अपने हाथों से उन्हें दवा देने का उसने नियम बना लिया था। उसकी इस सेवाचर्या से मां-बाप गदगद थे मगर उन्हें यह आश्चर्य था कि मां-बाप की उपेक्षा करने वाला बेटा एकाएक कैसे बदल गया। छुट्टियों में घर आने वाले इस बेटे को अपने बीवी बच्चों के सैरसपाटे और मौज-मस्ती का ख्याल रहता था। मां-बाप की बीमारी की कोई परवाह नहीं थी। एक दिन घर में उसके दोस्त के शब्द मां-बाप के कान में पड़ते बेटे की सेवा भावना का रहस्य खोल रहे थे ‘इसने अपने शहर में ट्रांस्फर के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, मगर सफलता नहीं मिली। अबकी बार इसने अपने प्रार्थना पत्र में मां-बाप की वृद्धावस्था। पिता की असाध्य बीमारी और उनकी समुचित देखभाल का हवाला दिया तब जाकर इसका तबादला शहर में हो गया है बच्चू को अब मां-बाप की जिम्मेदारी का अहसास हो गया है।’ मां-बाप अपने बेटे के इस अहसास को समझ चुके थे। उनकी आंखों से बरबस आंसू छलक पडे़। जिनमें ईश्वर के प्रति कृतज्ञता एवं बेटे के लिए दुआएं थी।

फर्क
    शहर में एक होटल में रंगरेलियां मनाते लोगों में मौहल्ले के लड़के भी पकड़े गये । उनमें मुहल्ले के दबंग मलिक साहब का लड़का हीरू और गरीब दीनू का लड़का बुधिया भी शामिल था । यह सुनकर भीखू का मन क्रोध और घृणा से भर गया । तभी सामने मलिक साहब आते दिखे। भीखू संभलकर कहने लगा ‘मैंनेजर साहब का लड़का ऐसा नहीं हो सकता ज$रूर उसे गलत फंसाया गया है। वह तो बहुत शरीफ लड़का है ।’ जब दीनू वहां से निकला तो सहसा भीखू के मुंह से अंगारे बरसने लगे ‘सालों के यहां खाने को रोटी नहीं, काम-धाम करते नहीं है अय्याशी करने चले हैं। इनको तो पुलिस के डंडे पड़ने ही चाहिये ।’ भीखू ने क्रोध और घृणा से जमीन पर थूक दिया ।

4 टिप्‍पणियां:

  1. laghu katha likhna aasan nahi hota, kyoki kam shabdo me apne vicharo ko sahi tarah se pesh karna aek badi kala hai jo lekhak एम. अशफाक कादरी ji me hai.unhe bahut -bahut badhai.

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  2. ashfaq ji bahut utkrishat laghukathayen .. bhav prabal aur kalevar bhi sugathit.. samaj ko sandesh parak l.k. pradan karne hetu dhanyvad...aage bhi apki l.k. se rubaru hote rahenge .. aisi asha ke sath...
    kishor ji bahut nek v badiya kary kiya hai l.k. lekhakon ko samne lane ka ... shukriya

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  3. अशफाक जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका लेखन अत्‍यंत मधुर व शिक्षाप्रद है, पढकर बहुत अच्‍छा लगा

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