मंगलवार, 29 नवंबर 2011

3, रेनू चौहान व उनकी लघुकथाएं:


पाठकों को बिना किसी भेदभाव के अच्छी लघुकथाओं व लघुकथाकारों से रूबरू कराने के क्रम में हम इस बार प्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती रेनू चौहान की लघुकथाएं उनके फोटो, परिचय के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। आशा है पाठकों को श्रीमती रेनू की लघुकथाओं व उनके बारे में जानकर अच्छा लगेगा।-किशोर श्रीवास्तव 


परिचयः
जन्म तिथिः 28 मार्च, 1955  जन्म स्थानः बबियाल (हरियाणा)
अभिरूचि:   साहित्य लेखन, पत्रकारिता, गृह विज्ञान एवं समाज सेवा।
शिक्षा:
-         गृह विज्ञान तथा पत्रकारिता एवं जन संचार में स्नातक डिग्री।
-          आहार विज्ञान एवं जन-स्वास्थ्य पोषण में स्नातकोत्तर डिप्लोमा।
-          समाज शास्त्र में एम00 एवं विस्तार शिक्षा में एम0 एस0 सी0
प्रकाशित पुस्तकें:
हिन्दी: बाल साहित्य पुस्तकें: शिवानी, छोटी या बड़ी, चन्दा मामा का पाजामा, रामू हाथी, पिटारा, मानव व पर्यावरण, गड़बड़ झाला, नैतिक कथाएं, रात की बारात, राजा के दो सींग, आदि। किशोरावस्था ; उलझाव सुलझाव - नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित
नवसाक्षरों हेतुः बंधेज की अनूठी कला, विश्वास की तलाश, कम खर्च अच्छा आहार, काश, भोजन और हमारा शरीर, बीमारी में भोजन कैसा हो, अच्छा भोजन, कल्पवृक्ष-नीम, पुस्तक का हिन्दी अनुवाद,
अन्यः नीली नदी, संयुक्ता ; देश की प्रतिनिधि कवियत्रियों की रचनाओं का संकलन  द्ध  तीसरा गजल  शतक  अंग्रेजी:  Cookery Wizard, Neem the Virtuous Tree. 
लेख: 
-          विभिन्न पत्र, पत्रिकाओं में दो सौ से भी अधिक लेख, कहानियां एवं कविताएं आदि प्रकाशित।  -          नवसाक्षरों के लिए विभिन्न ब्राशयरस व कहानियां प्रकाशित।
-          नेशनल ओपन स्कूल द्वारा ओपन बेसिक एजूकेशन के अन्तर्गत मूल लेखन व अनुवाद।
पुरस्कार:
-         हिन्दी अकादमी द्वारा बाल एवं किशोर साहित्य सम्मान।
-         चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगिताओं में कविताएं व कहानियां पुरस्कृत।
-          प्रौढ़ शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगिता में कहानी पुरस्कृत।
-          अखिल भारतीय फल व सब्जी प्रदर्शनी में छह पुरस्कार प्राप्त।
-           विभिन्न हिन्दी प्रतियोगिताओं में अनेक पुरस्कार।
अन्य उपलब्धियां:
दूरदर्शन कार्यक्रम: दूरदर्शन के विभिन्न चैनलों पर अब तक साठ से भी अधिक कार्यक्रमों का प्रसारण।
रेडियो कार्यक्रम: रेडियो के विभिन्न कार्यक्रमों (महिला, बाल, विदेश प्रसारण, ग्राम संसार, कृषि जगत आदि) में डेढ़ सौ से भी अधिक लेख, कहानियों, कविताओं व परिचर्चाओं आदि का प्रसारण।
दृश्य व श्रव्य आलेख: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एन. सी. ई. आर. टी.) (बाल कार्यक्रम) के लिए विभिन्न विषयों पर 15 से अधिक आलेखों का प्रोडक्शन।
अन्य:
-          अन्तर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण में लेक्चर व प्रदर्शनी आदि।
-           राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार व कार्यशालाओं का आयोजन।
-           विभिन्न स्वैच्छिक संस्थाओं की सदस्यता व उनकी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी।
-           जन शिक्षण संस्थान व अन्य कई संस्थाओं की रिसोर्स व्यक्ति।
संप्रति:      विस्तार निदेशालय, कृषि मंत्रालय में कार्यरत।
पता: बी-बी/6-बी, जनकपुरी, नई दिल्ली-110058
दूरभाष:     25616411, 25507423 (घर) 9818497419 (मोबाइल)
ई मेल: renu.chauhan@rediffmail.com     Blog: renusahitya.blogspot.com

लघुकथाएं:

काफ़िर

ओ युसुफ पकड़न पकड़ाई खेलें,“ दस वर्षीय नन्दू ने युसुफ को बाजू से ठेलते हुए कहा।
कोई उत्तर न पा आश्चर्य चकित होते हुए वह बोला, ”तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे युसुफ? मैं तुम से बात कर रहा हूँ और तुम सुन ही नहीं रहे।“  नन्दू कुछ रूआंसा होते हुए बोला।
अनमने भाव से युसुफ ने उत्तर दिया, ”मां कहती है मैं तुम से बात न करूं, तुम काफ़िर हो।
नन्दू ने हैरान होते हुए पूछा, ”काफ़िर...! काफ़िर क्या होता है? मैं तो तुम्हारा वही पुराना दोस्त नन्दू हूँ।
युसुफ कुछ सोचते हुए बोला, ”हां.. यार, यह काफ़िर क्या होता है, यह तो मुझे भी नहीं मालूम।
तभी नन्दू चिल्लाया, ”युसुफ बच...देख, सामने से मोटर आ रही है।
जब तक युसुफ सारी बात समझ कर हटता, नन्दू झपट कर युसुफ को अपने साथ लेकर सडक के दूसरी ओर आ गिरा। नन्दू की हथेलियों, कोहनियों और सिर से खून बह रहा था। युसुफ की भी टांगो और बाजुओं आदि में चोटें लगीं।
युसुफ घसीटते हुए नन्दू के करीब जा उस पर झुकते हुए बोला, ”नन्दू तुम्हारे सिर से तो बहुत खून बह रहा है।
नन्दू ने कहा, ”खून तो तुम्हारे माथे से भी बह रहा है युसुफ।
अपनी लहुलुहान हथेलियों की ओर देखते हुए, कुछ सोचते हुए युसुफ धीरे-धीरे बोला, ”तुम्हारा खून भी तो मेरे खून जैसा लाल है?  फिर मां क्यों कह रही थी कि मैं तुम से बात न करूं क्योंकि तुम्हारा खून गंदा है?“
युसुफ के साथे से टपकता खून नन्दू के सिर से बहते खून में धीरे-धीरे मिल रहा था। दोनों एक दूसरे की ओर डबडबाई आंखों से देख रहे थे।


एक रंग यह भी

सुबह-सुबह मेरा नौकर दौड़ता हुआ मेरे पास आया और बेहद प्रसन्न होते हुए बोला, “बीबीजी-बीबीजी, गांव से खबर आई है, मैं बाप बन गया हूँ। कल रात मेरी पत्नी ने बच्ची को जन्म दिया है।
खबर सुन कर मैं बेहद प्रसन्न हुई। पर दूसरे ही क्षण मैं मूक और अवाक खड़ी रह गई। हैरानी से मुंह बाए मेरे मुंह से केवल इतना ही निकला, ”अच्छा...।
मैं कुछ कहना तो चाहती थी पर...पर समझ नहीं पा रही थी कि कहूं या नहीं और यदि कहूं तो कैसे?
वास्तव में पिछले एक साल से वह गांव गया ही नहीं था। हां एक साल पहले उसकी पत्नी अवश्य शहर आई थी। दो महीने रह कर गई थी। शादी के तीन साल तक जब उसका बच्चा नहीं हुआ तो मैंने ही उसे इलाज के लिए शहर बुलवा लिया था। दोनों को डाक्टर के पास ले गई थी। डाक्टर ने इलाज किया। वापिस गाँव जाने से पहले उसकी जाँच करवाने पर पता चला था कि वह गर्भवती है। उसके एक महीने बाद गांव से खबर आई थी कि उसका गर्भपात हो गया है। खबर सुन कर हम सब को बहुत दुख हुआ।
उसके बाद बीच में छुट पुट कुशल मंगल के समाचार के बाद आज यह समाचार मिला, जिसे सुन कर मैं केवल मूक दर्शक बनी खड़ी थी।
अचानक मेरे मौन को भंग करते हुए, नज़रें नीचे गड़ाए, धीरे-धीरे वह बोला, ”जानता हूं जी, मेरे छोटे भाई से है पर, बच्चा तो मेरा ही कहलायेगा ना?“
ज़िन्दगी के अनेक रंगों में से एक रंग यह भी सही।एक लम्बी सांस लेते हुए मैं जैसे स्वयं से बुदबुदा उठी।

9 टिप्‍पणियां:

  1. श्रीमती रेनू चौहान जी के बारे में जान कर और उनकी कथाएं पढ़ कर अच्छा लगा
    लिखते रहिये

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  2. renu ji
    marvellous
    kafir-- to jabardast rahi aapki . jindgi to apni sidhi chal hi chalti hai . ye ham hi hai jo use n jaane kya-kya naam de dete hai . dono l.k. me bhavabhivyakti prabal , saral, sahaj, shabd vinyas aur sidhi v bodhgamy bhasha ka sanyojan . utkrisht v paripakv lekhan to hai hi aapka. hame bhi rah dikhate rahe .

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  3. बेहतरीन ब्लाग पर बेहतरीन लघुकथाएँ

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  4. कहने को ही , लघुकथा ,लिए बड़ा आकार !
    बढे यूंही बढ़ता रहे ,रेनू का संसार !!

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  5. यह रंग है या सहनशीलता से जंग है

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  6. AAp sab ko mera bahu bahut Dhanyavaad.

    Nukkad Ji

    Aapka comment bhi soch ka ek naya rang hai.
    Man se kiye kaam nayai rang hote hai, jabardasti ke soude sahansheelta se jang ke nayai rang hote hai.
    AAPKA BAHUT BAHUT DHANYAVAAD

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